घर की छत को बनाया 'ऑर्गेनिक स्वर्ग'; केंचुए की खाद चायपत्ती का पानी और एक बूंद नीम से तैयार कर दी सब्जियां
Growing Vegetables Using Vermicompost
अर्थ प्रकाश आदित्य शर्मा
पंचकूला। Growing Vegetables Using Vermicompost: जहां आज के दौर में कंक्रीट के ऊंचे भवन प्राकृतिक संपदा को ढंकते जा रहे हैं, वहीं पंचकूला की प्रतिष्ठित समाजसेविका अमिता मारवाह ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। पिछले 13 वर्षों से एएमएटी सोसाइटी के माध्यम से हजारों वंचित बच्चों के भविष्य को शिक्षा से रोशन करने वाली अमिता मरवाह ने अब अपनी छत को एक जीवंत 'ऑर्गेनिक स्वर्ग' का रूप दे दिया है। उनका यह प्रयास सिद्ध करता है कि यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो सीमित संसाधनों और शहरी व्यस्तता के बीच भी प्रकृति का जादू बिखेरा जा सकता है।
अमिता के लिए यह गार्डन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा का केंद्र बन गया है। उनके टेरेस पर वैज्ञानिक ढंग से व्यवस्थित 'ग्रो बैग्स' आज रसायनों से मुक्त, ताजी और पौष्टिक सब्जियों से लदे हुए हैं। अपनी इस यात्रा को साझा करते हुए वे बड़े ही सरल भाव से कहती हैं, "मैंने पिछले साल एक बहुत छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की थी। आज जब मैं प्रतिदिन 2 से 3 घंटे इन पौधों के साथ बिताती हूं, तो वह अनुभव किसी गहरे ध्यान (मेडिटेशन) से कम नहीं होता। मिट्टी से जुड़ना और एक नन्हे बीज को अंकुरित होते देखना रूहानी सुकून देता है।
ऑर्गेनिक खेती के माइंड ब्लोइंग रिजल्ट
इसके परिणाम वास्तव में विस्मयकारी (माइंड ब्लोइंग) और हृदय को तृप्त करने वाले हैं। वह बताती हैं कि आज के समय में घर की छत पर उन्होंने गाजर, मूली, पुदीना, शलगम, धनिया, पालक, चने का साग और मेथी के पौधे लगाये हैं। इनके बीज से लेकर पनपने और परिपक्व होने तक वे उनका बच्चों जेसे ख्याल रखती हैं। मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के लिए वह चायपत्ती का पानी, नीम के तेल का एक स्पून पानी में डाल कर तो कभी केंचुए की खाद का इस्तेमाल करते हैं। किसी केमिकल के मुकाबले बाहरी सब्जी से यह सब्जी ज्यादा समय तक ताजी, देर तक चलने वाली और हर समय सुगंधित रहती है।
साफ नीयत और अटूट धैर्य की जरूरत
अमिता मारवाह का मानना है कि प्रकृति की निस्वार्थ सेवा ही ईश्वर की सच्ची इबादत है। उनके अनुसार, इस 'सोलफुल' कार्य के लिए किसी विशेष विशेषज्ञता से अधिक साफ नीयत और अटूट धैर्य की आवश्यकता होती है। वे कहती हैं कि प्रकृति अत्यंत उदार है; यदि आप प्रेम और लगन से इसकी देखभाल करते हैं, तो यह आपको दस गुना फल और असीमित सकारात्मक ऊर्जा के रूप में आशीर्वाद देती है। वर्ष 2026 के इस पड़ाव पर, अमिता मरवाह ने शहरी निवासियों से 'ऑर्गेनिक फार्मिंग' अपनाने का आह्वान किया है।
खाली छतों को बनाएं खुशहाली का स्रोत
उनका संदेश स्पष्ट है: बाजार के हानिकारक रसायनों और कीटनाशकों से बचकर अपनी सब्जियां खुद उगाना ही वास्तविक 'आत्मनिर्भरता' और स्वास्थ्य की कुंजी है। उनकी यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हम अपनी छतों को केवल खाली स्थान न समझकर, उन्हें स्वास्थ्य, शुद्धता और खुशहाली का स्रोत बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ऑर्गेनिक फार्मिंग को देखकर अब लोग भी उन्हें घर बुलाकर फार्मिंग की प्लानिंग करने लगे है।